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7 महीने पहले भारत में दाखिल हुए थे सुंजवान आर्मी कैंप पर हमला करने वाले आतंकी : सैन्य सूत्र

थलसेना की शुरुआती जांच के मुताबिक, तीनों आतंकवादी पिछले सात महीने से जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में छुप-छुपकर रह रहे थे और हमले को अंजाम देने की ताक में थे.

नई दिल्ली : थलसेना सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि जम्मू की सुंजवान आर्मी कैंप में हमले को अंजाम देने वाले जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के तीनों आतंकवादी पिछले साल जून में घुसपैठ कर भारत की सीमा में दाखिल हुए थे. थलसेना की शुरुआती जांच के मुताबिक, तीनों आतंकवादी पिछले सात महीने से जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में छुप-छुपकर रह रहे थे और हमले को अंजाम देने की ताक में थे.

पिछले साल जून में भारत आए थे आतंकी

सूत्रों ने बताया कि हमले को अंजाम देने वाले जेईएम के आतंकवादी पिछले साल जून में उस वक्त पाकिस्तान से भारत आए थे जब घुसपैठ के मामलों में बढ़ोतरी हो गई थी. उन्होंने बताया कि सुंजवान हमले की विस्तृत जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट का परीक्षण थलसेना के शीर्षस्थ अधिकारी करेंगे.

सूत्रों ने बताया कि यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं जिससे ऐसे हमले दोबारा नहीं हों. उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास थलसेना के स्थानीय कमांडरों को पूरी आजादी दी गई है ताकि वे पाकिस्तानी सेना की किसी हिंसक गतिविधि का प्रभावी तरीके से जवाब दे सकें.

10 फरवरी को हुआ था सुंजवान आर्मी कैंप पर हमला

बता दें सुंजवान सैन्य शिविर पर 10 फरवरी को हुए हमले में थलसेना के छह जवान शहीद हुए थे जबकि एक आम नागरिक को भी जान गंवानी पड़ी थी. हमले को अंजाम देने वाले जेईएम के तीनों आतंकवादी सेना के साथ हुई मुठभेड़ में मार गिराए गए थे.

LOC पर पाकिस्तानी हरकतों का जवाब देने के लिए कमांडरों को पूरी छूट

इससे पहले 15 फरवरी को सेना में मौजूद सूत्रों ने बताया कि जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सैनिकों की किसी भी हिंसक कार्रवाई के खिलाफ सेना के स्थानीय कमांडरों को जोरदार तरीके से जवाब देने की पूरी छूट दी गयी है. सूत्रों ने कहा कि देश की सेना पिछले कुछ सप्ताह से नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी गोलीबारी का जवाब देते हुए पाकिस्तानी सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचा रही है.

उन्होंने कहा कि स्थानीय कमांडरों को किसी भी पाकिस्तानी दुस्साहस का जवाब देने की पूरी छूट दी गयी हैं. सेना नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी गोलाबारी का जवाब देने में एक सूझ बूझ भरी रणनीति के तहत काम कर रही है.

(इनपुट – भाषा)

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